Friday, August 13, 2010

नमस्ते,
क्षमा चाहता हु की मैं अपना ब्लॉग बहुत
दिनों के बाद अपडेट कर रहा हु लेकिन इसके पीछे विशेष कारन थे और मुझे समय नहीं मिल पा रहा था लेकिन आज मैं फिर आप सबके साथ हु इसकी मुझे तहे दिल से बहुत ख़ुशी है मेरा यहाँ आने के एक और कारन भी हो सकता है की अभी कुछ दिनों पहले मेरे एक पुराने और बहुत ही प्रिय मित्र ने मुझे फ़ोन किया और कहा की मुझे कुछ लिखना चाहिए देखिये लिखना बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन अगर मेरे लिखने से किसी भी एक व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है तोह ये मेरे लिए बहुत ही ख़ुशी की बात होगी मैं ये नहीं कहता की मेरे विचार बहुत ही उच्च हैं या बहुत ही प्रभावशाली हैं मैं बस इतना जनता हु की ये मेरे और सिर्फ मेरे विचार हैं

आज के दो दिन बाद १५ अगस्त है कुछ के लिए ये एक तारीख है कुछ के लिए एक देश का इन्देपेंदेंस डे है कुछ के लिए उनके देश का इन्दिपेंदेंस डे है कुछ के लिए ये स्वतंत्रता दिवस है कुछ के लिए छुट्टी का दिन कुछ के लिए मूवी जाने का दिन है कुछ के लिए मस्ती का दिन है कुछ के लिए यह एक अतुलनीय दिन है सबके लिए ये अलग दिन है और सबके लिए इसका मतलब अलग अलग है मैंने कई लोगो से ये सुना है की इस बार का १५औगुस्त रविवार होने की वजह से उनकी एक छुट्टी बेकार हो गयी बड़ा आश्चर्य होता है मुझे जब कोई इस महान दिन को छुट्टी का दिन कहता है

दूसरा साल है जब मैं १५ अगस्त के दिन दिल्ली में रहूँगा, जब मैं अपने उस छोटे से शहर बस्ती में अपने घर पर टीवी पर १५ अगस्त को देखता था की दिल्ली में झंडा फहराया जा रहा है तोह मुझे लगता था की कितने सौभाग्यशाली लोग हैं वो जो उस झंडे को देखते होंगे और सोचता था की पूरी दिल्ली इस दिन के जश्न्न में सराबोर रहती होगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं है यहाँ तोह बस शौपिंग माल्स में जो विदेशी कंपनिया हैं वो दिखाने केलिये बहार तिरंगे के रंग के बलूंस लगा देते जहा से हमारे देश के नौजवान शौपिंग करके स्वतंत्रता दिवस मानते हैं उन्हें इसका मातब यही मालूम है उसके बाद वो पिज्जा हट या मक दोनाल्ड्स में कुछ खायेंगे तोह ये जश्न पूरा हो जाता है

मैं बहुत ज्यादा नहीं कहना चाहूँगा बस इतना कहना चाहता हु के वो लड़के लड़कियां जो जिंदगी मात्र एक मजा मानते हैं और उसे हमेशा इसी तरह बिता देना चाहते हैं क्योंकि वो नहीं जानते की असल जिंदगी होती क्या है वो नहीं जानते की असल दुःख होता क्या है वो सिर्फ मजे लेने में अपनी जवानी बिताते हैं औरजब उन्हें समझ आता है तोह बहुत देर हो चुकी होती है मैं ये अपील करना चाहता हु की आप सभी लोग जो इस तरह से शौपिंग माल्स में मोविएस में और बहुत ढेर सरे दिखावे में अपना पैसा बर्बाद करते हैं वो कृपया करके जितना वो खर्च करते हैं उसका पांच फ़ीसदी बस पांच फ़ीसदी बचाएँ और उन पैसो को जोड़ने के बाद किसी जरुरत मंद को जिसके पास ये विकल्प नहीं होते की वो आज बुर्गेर खाए या पिज्जा उसे दान नहीं सहायता करें जिंदगी में कुछ तोह अच्छा काम कीजिये भगवान आपका भला करेगा

















आपका - भावेश कुमार पाण्डेय 'विनय'
.३० १३ अगस्त
लक्ष्मीनगर, दिल्ली

1 comment:

Rajesh Shukla said...

यार भावेश, सबसे पहले तो आपको बधाई वैसे आप काफी अच्छा लिखते हैं और लिखने तक तो ठीक है साथ साथ फोटो का भी कलेक्शन काफी शानदार है। वैसे क्या यह फोटोज बस्ती से ही लिए गए हैं। यदि हां तो यह और भी सुंदर है। आज के समय में लिखना और उससे ज्यादा अपने आसपास घट रही अच्छी और बुरी चीजों को महसूस करना दोनों ही जरूरी है। किसी समस्या पर व्यंग्यात्मक लहजे में लिखना, सीरियस राइटिंग से ज्यादा टफ है। वैसे अच्छा लिखते हो और मैं तो यार तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं हूं। मैने अपने जीवन में कुछ लक्ष्य बना लिए हैं, जिस पर मैं अब काम शुरू करना चाहता हूं। लक्ष्य बहुत मुश्किल है, लेकिन असम्भव नहीं, मैं उसमें तुम्हारा योगदान चाहता हूं। कभी मौका मिलेगा तो बताउंगा। हो सकता हैं कि तुम्हे यह अच्छा लगे।
राजेश शुक्ला, बस्ती